खेतों में मजदूरी करती थी लड़की, BSF में हुआ सिलेक्शन, गांव वालों ने किया ढोल नगाड़ों के साथ वादक

दोस्तों किसी समय हमारे समाज की व्यवस्था कुछ ऐसी थी की बेटियों को काफी कमजोर भावना से देखा जाता था। ऐसा कहा जाता था कि बेटियां बेटों की बराबरी नहीं कर सकती। लेकिन आज के समय में पूरा नजारा बदल चुका है। बेटियां भी हर क्षेत्र में अपना नाम और अपने परिवार का नाम रोशन कर रही है। इतना ही नहीं बेटियों ने अपना और अपने परिवार के सहित पूरे देश का भी नाम कई सारे क्षेत्रों में रोशन करवाया है।

इसी कड़ी में हम आपको एक ऐसी बेटी के बारे में बताने जा रहे हैं जो किसी समय खेतों में मजदूरी किया करती थी और अपनी मेहनत और लगन के बल पर वह बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स में शामिल हो चुकी है।

खेतों में मजदूरी करती थी लड़की, BSF में हुआ सिलेक्शन, गांव वालों ने किया ढोल नगाड़ों के साथ वादक
खेतों में मजदूरी करती थी लड़की, BSF में हुआ सिलेक्शन, गांव वालों ने किया ढोल नगाड़ों के साथ वादक

खेतों में मजदूरी करती थी संध्या

राजगढ़ जिले के पिपल्या रसोड़ा गांव में की रहने वाली संध्या एक बहुत ही सामान्य परिवार से आती है। संध्या के पिता का नाम देवचंद भिलाला है। देवचंद भिलाला मजदूरी का काम किया करते हैं और उनकी आर्थिक परिस्थिति बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है। देवचंद भिलाला को कुल 5 बच्चे हैं जिनमें तीन बेटियां और दो बेटे हैं।

संध्या देवचंद भिलाला की तीसरे नंबर की बेटी है। परिवार की आर्थिक परिस्थिति में सहयोग करने के लिए संध्या खुद भी खेतों में मजदूरी करने के लिए जाती थी। लेकिन उसे पढ़ने लिखने का भी काफी शौक था।

खेतों में मजदूरी करती थी लड़की, BSF में हुआ सिलेक्शन, गांव वालों ने किया ढोल नगाड़ों के साथ वादक
खेतों में मजदूरी करती थी लड़की, BSF में हुआ सिलेक्शन, गांव वालों ने किया ढोल नगाड़ों के साथ वादक

काफी मेहनत से की पढ़ाई

खेतों में मेहनत मजदूरी करके जो पैसा इकट्ठा किया जाता था उस पैसों से संध्या अपनी पढ़ाई करती थी और किताबें भी खरीदी थी। संध्या ने अपनी 12वीं तक की शिक्षा पूरी की और बाद में m.a. की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान संध्या ने आर्मी में सिलेक्ट होने की प्रक्रिया के लिए तैयारी भी शुरू कर दी। संध्या काफी मेहनत और लगन से पढ़ाई करती थी जिसका परिणाम यह हुआ कि 27 साल की उम्र में संध्या को बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स में नौकरी मिल गई। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स में सिलेक्ट होने पर संध्या के पूरे परिवार सहित पूरे गांव वालों ने जश्न मनाया।

खेतों में मजदूरी करती थी लड़की, BSF में हुआ सिलेक्शन, गांव वालों ने किया ढोल नगाड़ों के साथ वादक
खेतों में मजदूरी करती थी लड़की, BSF में हुआ सिलेक्शन, गांव वालों ने किया ढोल नगाड़ों के साथ वादक

गांव वालों ने किया जोरदार स्वागत

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संध्या का सिलेक्शन होने के बाद ट्रेनिंग के लिए वह राजस्थान गई हुई थी। लगभग 8 महीने की ट्रेनिंग खत्म होने के बाद संध्या अपने गांव वापस लौटी तो पूरे गांव वालों ने धूमधाम से संध्या का स्वागत किया। संध्या का सिलेक्शन बीएसएफ में होना यह पूरे गांव के लिए गर्व की बात थी।

इसलिए पूरे गांव ने संध्या का स्वागत ढोल नगाड़े बजाकर और पटाखे फोड़कर किया। संध्या का गांव में आगमन होते ही पूरा गांव खुशी से झूम उठा। इस घटनाक्रम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुई और हर कोई संध्या को बधाई देने लगा।

About the Author: Rani Patil

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