किसान का बेटा बना IAS, अस्पताल में रहकर की पढ़ाई, ज्योतिषी ने कहा था नहीं बन पाओगे IAS

दोस्तों सोशल मीडिया के माध्यम से आए दिन हमें यूपीएससी से जुड़ी हुई कई सारी ऐसी खबरें सुनने को मिलती है जिन्हें सुनकर हमें काफी प्रेरणा मिलती है। ऐसी ही एक प्रेरक दास्तान हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे एक किसान का बेटा भारी कठिनाइयों को पार करते हुए आईएएस बन गया और उसने उस जोशी जी बात को गलत साबित कर दिखाया है जिसने उसे कहा था कि वह कभी यूपीएससी की परीक्षा पास नहीं कर पाएगा। अपनी मेहनत और लगन के बल पर इस लड़के ने वह कर दिखाया जो बड़े बड़े होशियार विद्यार्थियों के लिए कर पाना काफी मुश्किल रहता है।

किसान का बेटा बना IAS, अस्पताल में रहकर की पढ़ाई, ज्योतिषी ने कहा था नहीं बन पाओगे IAS
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पिता ने पढ़ने के लिए भेजा था दिल्ली

हम बात कर रहे हैं नवजीवन पवार की। नवजीवन ने साल 2018 में यूपीएससी की परीक्षा पास की थी। उनकी इस जीत से उनके परिवार वालों समेत उनके दोस्तों को काफी खुशी हुई थी। क्योंकि नवजीवन का जीवन सच में काफी कठिन था। नवजीवन का जन्म महाराष्ट्र के एक गांव में बहुत ही सामान्य परिवार में हुआ था।

उनके पिता खेती किसानी करते हैं और परिवार के आर्थिक परिस्थिति बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है। लेकिन नवजीवन के पिता ने उनकी पढ़ाई लिखाई पर खर्च करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और उन्हें यूपीएससी की तैयारी करने के लिए दिल्ली पढ़ने के लिए भेजा।

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प्रीलिम्स के बाद हो गया था डेंगू

नवजीवन भी अपने पिता की उम्मीदों पर खरे उतरने के लिए मेहनत और लगन से पढ़ाई करने लगे और उन्होंने यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली। लेकिन प्रारंभिक परीक्षा पास करते हैं उन्हें डेंगू हो गया। इस बात की जानकारी उन्होंने अपने पिता को दी तो उनके पिता ने उन्हें दिल्ली से वापस गांव बुला लिया और वहां उन्हें अस्पताल में भर्ती करवा दिया।

इस समय नवजीवन काफी हताश हो रहे थे क्योंकि मेंस की परीक्षा सिर पर थी और इसी बीच उन्हें डेंगू हो गया था। लेकिन नवजीवन के पिता ने उन्हें काफी हिम्मत दी और कहा कि इंसान के सामने दो रास्ते होते हैं या तो रोपण या तो लड़ पढ़ो। अपने पिता की सलाह पर नवजीवन ने दूसरा रास्ता अपनाया और लड़ पड़े।

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अस्पताल में रहकर की पढ़ाई

नवजीवन में अस्पताल में भर्ती रहते हुए ही अपने दोस्तों और सीनियर विद्यार्थियों की मदद से यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। उन्हें कोई भी डिफिकल्टी होती तो वे तुरंत अपने सीनियर से संपर्क कर पूछ लेते। अस्पताल में बीमारी से जूझते हुए भी नवजीवन ने हिम्मत नहीं हारी और वे लगातार आगे बढ़ते रहें और पढ़ाई करते रहें। नवजीवन को भी आखिरकार उनकी मेहनत और लगन का फल मिला और साल 2018 में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 316 हासिल कर यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली। नव जीवन की इस जीत से उनका मन काफी गदगद हो गया।

ज्योतिषी ने कहा था नहीं पास कर पाओगे यूपीएससी

बता दे कि नवजीवन ने अपनी पढ़ाई के दौरान और भी कई सारी मुश्किलें जेली। उन्हें एक ज्योतिषी ने कहा था कि वह कभी यूपीएससी की परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे। लेकिन उन्होंने उस ज्योतिषी की बात को झूठ साबित कर दिखाया। इतना ही नहीं पढ़ाई के दौरान नवजीवन को कुत्ते ने भी काट लिया था। इससे भी बड़ा सदमा उन्हें उसी साल लगा जब उनका मोबाइल फोन चोरी हो गया। उस मोबाइल फोन में नव जीवन का बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण डाटा सेव था। लेकिन इन सारी बाधाओं को पार करते हुए आखिरकार नवजीवन अपनी मंजिल तक पहुंच ही गए।

About the Author: Rani Patil

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