एक गांव ऐसा भी, जहां किसी भी घर, टॉयलेट, बैंक में नही है दरवाजे

एक गांव ऐसा भी, जहां किसी भी घर, टॉयलेट, बैंक में नही है दरवाजे

क्या आपने कभी कल्पना की है कोई गांव ऐसा भी हो सकता है जहाँ के घरों में दरवाजे नही होते।
हैं ना अपने आप मे हैरान कर देने वाली बात?.
जी हां आज हम आपको एओ ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे है जहाँ घरों, बैंक और बाथरूम में भी दरवाजे नही हैं।

ये गांव है शनि शिगनापुर ये गांव मुम्बई से 300 किलोमीटर पूर्व में स्थित है।

एक गांव ऐसा भी, जहां किसी भी घर, टॉयलेट, बैंक में नही है दरवाजे
एक गांव ऐसा भी, जहां किसी भी घर, टॉयलेट, बैंक में नही है दरवाजे

शनि शिग्नापुर महाराष्ट्र के अहमदनगर में स्थित है जहां घरों के दरवाजे नहीं हैं। इस गांव में रहने वाले लोग चाहे किसी भी धर्म के हों, लेकिन सभी के घरों में ऐसा ही है। और तो और यहां के लोगों को अपने सामान को लेकर भी निश्चिन्त है इन्हें कोई चिंता नहीं रहती कि बिना दरवाजे के कोई घर में घुस कर चोरी कर ले क्योंकि यहां कोई चोरी होती ही नहीं।

शनि शिंगणापुर गांव के लोगों द्वारा घरों में दरवाजे ना लगवाने के पीछे की वजह इस गांव में विराजमान शनि महाराज का होना है। लोगों का मानना है कि शनि महाराज ही उनके घरों की रक्षा करते हैं। शनि के कोप के चलते यहां कोई चोर फटकता तक नहीं। ऐसा यहां पर पिछले 350 सालों से चला आ रहा है।

एक गांव ऐसा भी, जहां किसी भी घर, टॉयलेट, बैंक में नही है दरवाजे
एक गांव ऐसा भी, जहां किसी भी घर, टॉयलेट, बैंक में नही है दरवाजे

वहाँ के रहने वालों के अनुसार, उन्हें घरों के ताले लगाने की ज़रूरत नहीं है, क्यों कि उन्हें शनि देव से सुरक्षा का वरदान मिला हुआ है। शनि शिग्नापुर में भगवान शनि देव का प्रसिद्ध मंदिर है जहां श्रद्धालु शनि देव की पूजा करने आते हैं।

बैंक के भी दरवाजे नहीं

एक गांव ऐसा भी, जहां किसी भी घर, टॉयलेट, बैंक में नही है दरवाजे
एक गांव ऐसा भी, जहां किसी भी घर, टॉयलेट, बैंक में नही है दरवाजे

जी हाँ, इस गाँव में बैंक के भी दरवाजे नहीं हैं। गाँव की विश्वास और श्रद्धा से प्रेरित होकर यहाँ यूनाइटेड कमर्शियल बैंक (यूको) ने ‘लोकलेस’ ब्रांच ओपन की है, इस बैंक में भी दरवाजे नहीं लगवाए गए हैं। दरवाजा रहित यह बैंक 2011 में खोला गया था और आज इसके तीन हजार से ज़्यादा खाताधारक हैं।

बैंक के एक कर्मचारी का कहना है कि… “कोई भी बैंक उचित सुरक्षा प्रबंधों और लॉकर सुविधा के बिना नहीं चल सकता। हमारे यहाँ दरवाजा है लेकिन इसमें कोई परंपरागत ताला नहीं है। यह रिमोट कंट्रोल से नियंत्रित इलेक्ट्रोमेग्नेटिक लॉक है। हम यहाँ परम्पराओं को नहीं तोड़ सकते, लेकिन साथ ही सुरक्षा से भी समझौता नहीं कर सकते।“

एक गांव ऐसा भी, जहां किसी भी घर, टॉयलेट, बैंक में नही है दरवाजे
एक गांव ऐसा भी, जहां किसी भी घर, टॉयलेट, बैंक में नही है दरवाजे

यहां के निवासियों के मुताबिक आज से करीब 350 साल पहले इस गांव में जबरदस्त बरसात हुई थी जिसमें सभी घरों के दरवाजे बह गए। उसी बारिश के दौरान एक 5 फुट से भी बड़ी और 1 फुट चौड़ी काले पत्थर की शिला बहकर आई। यह शिला गांव के किनारे स्थित एक पेड़ के सहारे खड़ी हो गई। इसे गांव के चरवाहों ने देखा और वहां से हटाना चाहा तो इसमें से खून बहने लगा तो उसे वैसे ही छोड़ दिया।

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